हिमाचल प्रदेश में हुए प्रजा मण्डल आंदोलन का विस्तार में वर्णन
आल इंडिया स्टेट पीपुल कांफ्रेंस-
19 वीं शताब्दी के
अंत में तथा बीसवीं
शताब्दी के आरम्भिक वर्षों
में पहाड़ी रियासतों के लोगों में
बड़ी तेजी से जागृति
आई| वहाँ भी उत्तरदायी
सरकार स्थापित करने के लिए
आंदोलन आरम्भ होने लगे| कांग्रेस
ने भी इस बात
को समझा की वह
रियासती प्रजा को मार्ग दिखाए|
साथ ही कांग्रेस को
पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त करनी थी| इसमें
देशी रियासतें भी शामिल थीं|
ये रियासतें भारत के ही
टुकड़े थे,जिन्हें भारत
दे पृथक नहीं रखा
जा सकता था| 17 दिसंबर,1927
में बंबई में "आल
इंडिया स्टेट्स पीपुल कांफ्रेंस" (अखिल भारतीय रियासती
प्रजा परिषद) का गठन किया
गया| इसका प्रथम अधिवेशन
भी सं 1927 ई.में हुआ|
लुधियाना कांफ्रेंस-
15-16 फरवरी 1939 को लुधियाना में
"आल इंडिया स्टेट्स पीपुल कांफ्रेंस" का सम्मेलन जवाहर
लाल नेहरू की अध्यक्षता में
हुआ| पं.नेहरू ने
रियासतों में प्रजा मण्डल की स्थापना पर जोर दिया|
उन्होंने यह विचार व्यक्त
किया कि छोटी रियासतें
मिलकर संगठन बनायें ताकि संगठन शक्तिशाली
बने| लुधियाना में इस अधिवेशन
में शिमला की पहाड़ी रियासतों
से पं.पद्मदेव, भागमल
सौहटा थे| मण्डी से
स्वामी पूर्णानंद, सिरमौर से ठाकुर हितेंद्र
सिंह,बिलासपुर से सदाराम चंदेल,
चम्बा से विद्या सागर,विद्याधर, गुलाम रसूल और पृथ्वी
सिंह ने भाग लिया|
इसके पश्चात इन पहाड़ी रियासतों
में तेजी मण्डल बनने
लगे|
सिरमौर
में प्रजा मण्डल का गठन-
अखिल
भारतीय रियासती प्रजा परिषद के प्रस्तावों से
प्रभावित हो कर सिरमौर
में हिमाचल की सबसे पहली
प्रजा मण्डल संस्था का गठन किया
गया| इसके सस्न्थापक पं.राजेंद्र दत्त थे| उन्होंने
इनका कार्यालय नाहन के स्थान
पर पांवटा में स्थापित किया
इसमें चौधरी शेर जंग, मास्टर
चतर सिंह,सालिग राम,
कुंदन लाल, अजायब आदि
ने सक्रिय भाग लिया| 12 अक्टूबर,1930
ई.को पंजाब तथा
पहाड़ी रियासती प्रजा का प्रथम सम्मेलन
लुधियाना में हुआ| इसमें
सिरमौर के पांवटा से
सरदार भगत सिंह और
दो अन्य लोगों ने
सिरमौर रियासत का प्रतिनिधित्व किया|
इसी अवधि में सिरमौर
रियासत के पं.शिवानंद
रमौल ने दिल्ली में
स्थित "सिरमौरी एसोसिएशन" का सदस्य बनकर
अपने आंदोलनकारी जीवन का आरम्भ
किया| रियासत के
भीतर राजेंद्र दत्त आदि इसका
संचालन करते रहे| 1934 ई.
में सिरमौर रियासत में कुछ लोगों
ने एक सिरमौर प्रजा
मण्डल की स्थापना की|
इसमें डॉ. देवेंद्र सिंह,रामनाथ और आत्मा राम
संस्थापक सदस्य बने|
बुशैहर
प्रजा मण्डल-
बुशैहर प्रजा मण्डल को 1945 ई.में पुनः
सक्रिय करने के लिए
बुशैहर की अन्य सस्थाओं
जैसे-बुशैहर सुधार सम्मेलन, बुशैहर प्रेम सभा और सेवक
मण्डल दिल्ली ने भी बुशैहर
के लोगों को संगठित किया|
पं. पद्मदेव ने शिमला में
इसके लिए कार्य किया
और रियासत के भीतर पं.
घनश्याम और सत्यदेव बुशैहर
और अन्य कई नेतओं
ने किया|
चम्बा
सेवक संघ-
मार्च 1936 में
चम्बा रियासत में कुछ लोगों
ने "चम्बा सेवक संघ" नाम
से एक संस्था का
गठन किया| बाद में यह
संस्था राजनैतिक संगठन में बदल गई|
अतः सरकार ने इस संघ
पर प्रतिबंध लगा दिया| परिणामस्वरूप
संघ अपनी गतिविधियों का
केंद्र डलहौज़ी बना लिया|
धामी प्रेम प्रचारणी
सभा-
धामी रियासत के शिमला के निकट होने के कारण यहाँ के बहुत से लोग शिमला में नौकरी
करते थे| उन्होंने अपनी रियासत में सुधार लाने के उद्देश्य से 1937 ई. में एक
"प्रेम प्रचारिणी सभा" बनाई| शिमला में कार्यरत बाबा नारायण दास को इसका
अध्यक्ष और पंडित सीता राम को मंत्री बनाया गया| आरम्भ मे इसका उद्देश्य सामजिक और
आर्थिक सुधार था, परन्तु बाद में इसमें राजनैतिक कार्यों में भी भाग लेने और आंदोलन
की बात होने लगी|
धामी प्रजा
मंडल-
इसी दौरान धामी रियासत की 'प्रेम प्रचारिणी
सभा' ने सरकार के दमन से बचने के लिए रियासती प्रजा मंडल शिमला में शामिल होने की योजना
बनाई| इसी उद्देश्य को लेकर 13 जुलाई 1939
ई. को भागमल सौहटा की अध्यक्षयता में शिमला के निकट कुसुम्पटी के पास कैमली स्थान पर
शिमला की पहाड़ी रियासतों के प्रजा मंडलों की एक बैठक हुई | इस बैठक में धामी रियासत
की "प्रेम प्रचारिणी सभा" को "धामी प्रजा मंडल" में बदलदिया गया| धामी
के पंडित सीता राम को इस संगठन का प्रधान नियुक्त किया गया| इस अवसर पर धामी प्रजा
मंडल की और से एक प्रस्ताव पारित किया गया|
धामी गोली काण्ड-
भागमल सौहटा 16 जुलाई को लगभग ग्यारह बजे शिमला से एक छोटे से दल को लेकर धामी के लिए
चल पड़े| इस दल के दो सदस्यों भगत राम और देवी सरन ने कांग्रेस का झंडा उठा रखा था|
जब भागमल सौहटा और उनके साथी धामी की सीमा
के पास गनाहटी के पास पहुँचे तो रियासत के सिपाहियों ने सत्याग्रहियों के नेता भागमल
सौहटा को हिरासत में ले लिया और धार्मी ले गए| सत्याग्रहियों के स्वागत हेतु इकट्ठे
हुए लोग राणा के विरुद्ध नारे लगाते हुए राणा के निवास स्थान के पास पहुँचे| राणा ने
भयभीत होकर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाने का आदेश दे दिए| इससे वहाँ खलबली
मच गयी और बहुत से लोग बुरी तरह से घायल हो गए| दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी| सत्याग्रह
के नेता भागमल सौहटा को गिरफ्तार करके अम्बाला भेज दिया|
शिमला हिल स्टेट्स
रियासती प्रजामण्डल (हिमाचल रियासती प्रजा मंडल) की स्थापना:-
1 जून 1939 को शिमला
पहाड़ी राज्यों के लोगों के प्रतिनिधियों की शिमला में एक सभा हुई| इसमें राजाओं और
राणाओं की गुप्त गतिविधियों को प्रकाश में लाया गया| लुधियाना सम्मेलन से प्रभावित
होकर शिमला की पहाड़ी रियासतों की विभिन संस्थानों ने एक सयुंक्त संस्था बनाई, जिसका
नाम "शिमला हिल स्टेट्स रियासती प्रजा मंडल" रखा गया| इस संस्था की स्थापना
में बुशेहर के पं. पदमदेव और जुब्बल के भागमल सौहटा ने विशेष योगदान दिया| इसमें पं.
पदमदेव को प्रधान और भागमल सौहटा को महामंत्री बनाया गया|
हिमाचल हिल
स्टेट्स कौंसिल-
सन 1945 के अंत में उदयपुर में "आल इंडिया स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस"
का अधिवेशन हुआ| अधिवेशन के पश्चात वहीं पर पहाड़ी रियासतों से गए प्रजा मंडल के प्रतिनिधियों
ने अपने क्षेत्र में प्रजा मंडल को सुचारु रूप से चलाने के लिए जनवरी 1946 में
"हिमाचल हिल स्टेट्स रीजनल कौंसिल" नामक एक संस्था की स्थापना की| इसके प्रधान स्वामी पूर्णानंद बनाए गए और उनका कार्यलय
मंडी रखा गया| पं. पदमदेव को इसका मुख्य सचिव बनाया गया और उनका कार्यालय शिमला में
रखा गया| इसके अतिरिक्त श्याम चंद नेगी को उप प्रधान तथा शिवानंद रमौल को सयुंक्त सचिव
बनाया गया| "हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल कौंसिल" का पहला सम्मलेन 8 से 10
मार्च, 1946 को मंडी में हुआ| कौंसिल के प्रधान स्वामी पूर्णानंद, महामंत्री पदमदेव
और सयुंक्त सचिव शिवानंद रमौल के अतिरिक्त सुकेत, मंडी, बिलासपुर, चम्बा, नालागढ़, बघाट
और शिमला की पहाड़ी रियासतों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया| इस सम्मलेन
की अध्यक्षता करने के लिए आज़ाद हिन्द फ़ौज के सुप्रसिद्ध सेनानी कर्नल गुरदयाल सिंह
ढिल्लो भी मंडी पहुँचे|
31 अगस्त और
पहली सितम्बर 1946 को हिमालयन स्टेट्स रीजनल कौंसिल का सम्मलेन नाहन-सिरमौर में हुआ|
––इस सम्मलेन में ऑल इंडिया स्टेट्स पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. पट्टाभिसीतारमैया
तथा जयनारायण व्यास महामंत्री, कर्नल शाहनवाज़, दूनि चंद अंबालवी आदि के साथ पहाड़ी रियासतों
के चालीस से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित हुए| प्रजा मंडल सिरमौर के नेता का राजेंद्र दत्त,
शिवानंद रमौल, डॉ. देवेंद्र
सिंह हितेंद्र सिंह, धर्म नारायण, हरिचन्द्र पाधा और उनके सहयोगी आंदोलनकारियों द्वारा
आयोजित इस सम्मलेन से सिरमौर रियासत में अभूतपूर्व जागृति पैदा हुई, जिससे रियासती
सरकार की जड़ें हिल गईं| इसी काल में चिरंजी लाल ने वापिस शांगरी जा कर वहां बेगार के
विरुद्ध आंदोलन आरम्भ किया| इसी वर्ष ज्ञान चंद टूटू कोहिस्तान प्रजा मंडल के प्रधान
बने| नवंबर 1946 ई. में सत्यदेव बुशैहरि बुशैहर प्रजा मंडल के प्रधान बने|
इसी काल
में भागमल सौहटा ने रियासत जुब्बल में प्रजा मंडल आंदोलन को विशेष गति प्रदान की| जय
लाल शरखोली, मास्टर राम रत्न, मियां काहन सिंह आदि ने भी इस आंदोलन में भाग लिया| बलसन
रियासत में तो इस आंदोलन ने उग्र रूप धारण किया| फरवरी 1947 ई.में भज्जी के लीला दास
वर्मा, बिलासपुर के कांशीराम उपाध्याय और प्रजा मण्डल के कुछ अन्य कार्यकर्ता डॉ. यशवंत
सिंह के पास दिल्ली गए और उन्हें शिमला ले आए| शिमला में पं.पद्मदेव, शिवानंद रमौल,
दौलत पाम सांख्यायन, पं सीता राम,दुर्गा सिंह राठौड़ और अन्य पहाड़ी नेताओं के आग्रह
पर डॉ.यशवंत सिंह राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हुए| उन्होंने शिमला के निकट
संजौली में कृष्ण विला लॉज में रहना आरम्भ किया| वहीं पर संजौली में लीला दास वर्मा
ने प्रजा मण्डल का कार्यालय भी खोला| इसके साथ ही डॉ.यशवंत सिंह परमार ने स्थायी रूप
से राजनीति में पदार्पण करके पहाड़ी रियासतों में आंदोलन का नेतृत्व करना आरम्भ किया|
पहली मार्च
1947 को हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल कौंसिल की बैठक शिमला में हुई| इस बैठक में कौंसिल
के पदाधिकारियों के चुनाव हुए| डॉ.यशवंत सिंह परमार को इसका प्रधान और पं पद्मदेव को
इसका महामंत्री निर्वाचित किया गया| अप्रैल 1947 में डॉ. परमार दिल्ली से दौलत राम
सांख्यायन,नरोत्तम शास्त्री, लीला दास वर्मा, शिवानन्द रमौल आदि के साथ कांग्रेस के
ग्वालियर अधिवेशन में भाग लेने के लिए गए|
हिमालयन हिल
स्टेट्स सब रीजनल कौंसिल-
10 जून, 1947 ई. को हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल कौंसिल की एक
अन्य बैठक शिमला के रॉयल होटल में हुई| इसमें 16 सदस्यों में से ११ सदस्यों ने बैठक
में भाग लिया| इस बैठक में सदस्यों में मतभेद पैदा हो गए और छ: सदस्यों ने एक अलग संगठन
बना लिया| इस संगठन का नाम "हिमालयन हिल स्टेट्स सब-रीजनल कौंसिल" रखा गया| इस नई कौंसिल के प्रधान डॉ.यशवंत सिंह परमार चुने
गए|
अगस्त 1947
में सिरमौर प्रजा मण्डल ने नाहन में एक बड़ा सम्मेलन किया| इसके मुख्य आयोजक पं.राजेंद्र
दत्त,डॉ. देवेंद्र सिंह,धर्म नारायण वकील,पं.शिवानन्द रमौल थे| इस सम्मेलन में सिरमौर
के राजा राजेंद्र प्रकाश ने भी भाग लिया| सम्मेलन में हिमालयन हिल स्टेट्स सब-रीजनल
कौंसिल के अध्यक्ष डॉ.यशवंत सिंह परमार को सभापति बनाया गया और उन्होंने राष्ट्रीय
झंडा लहराया|
प्रतिनिधि सरकारें-
कुनिहार
के ठाकुर ने इस आंदोलन को बहुत प्रशंसा की और अपने राज्य के लोगों को प्रशासन में सम्मिलित
कर लिया| यह देखकर कुछ अन्य शासकों ने भी ऐसा ही किया| स्वाधीनता दिवस के अवसर पर ठियोग
रियासत के प्रजा मण्डल के नेताओं ने राणा कर्मचंद को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया|
कुछ समय के पश्चात राणा ने मंत्री परिषद की घोषणा कर दी, जिसके 13 सदस्य थे| महात्मा
गाँधी और सरदार पटेल ने इस कदमों का स्वागत किया परन्तु पाँच मास के पश्चात राणा ने
खजाने पर कुछ लोगों की सहायता से कब्जा कर लिया| सरदार पटेल के हस्तक्षेप पर सशस्त्र
पुलिस ठियोग भेजी गए| शासक को पकड़ कर वहाँ से बाहर निकाल दिया गया| ठियोग पहली रियासत
थी, जो हिमाचल प्रदेश के बनने से पूर्व ही भारतीय संघ में मिल गई|
हिमाचल प्रदेश में हुए प्रजा मण्डल आंदोलन के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
- सिरमौर रियासत प्रजा मंडल की सथापना कब हुयी...1934 ई.
- जुलाई 1939 को किसने धामी रियासती (प्रजा) मंडल की सथापना की...भागमल सौठा
- जुलाई 1939 को किस प्रजा मंडल के नेता ने धामी की और कूच का नेतृत्व किया जिसमे अंतत: गोली चली जिससे दो लोग मारे गए...धामी (भागमल सौठा)
- मार्च 8 से 10, 1946 को मंडी रियासत के मंडी शहर मे जो प्रजा मंडल समेलन हुआ उसकी अध्यक्षता किसने की थी...स्वामी पूर्णानंद
- मुल्तान जेल से रिहा होना के बाद किस राष्ट्रवादी नेता ने 1938 मे सिरमौर जिले की तहसील मे प्रजा मंडल कमेटी का गठन किया ...चौधरी शेरजंग
- बुशैहर रियासत मे मार्च 1947 के प्रजा मंडल सत्याग्रह का नेतृत्व किसने किया था...सत्यदेव बुशैहरी
- निम्नलिखित मे से कौन (प.पदमदेव /ज्ञानचंद टूटू /भास्कर नन्द शर्मा /वीरबद्र सिंह)प्रजा मंडल का नेता नहीं हैं...वीरबद्र सिंह
- प्रेम प्राचारिणी सभा धामी रियासत प्रजा मंडल मे कब तब्दील किया...1939को
- निम्नलिखित मे से कौन सिरमौर रियासत के प्रजा मंडल आंदोलन से जुड़ा नहीं था ?(प.सीता राम/चोधरी शेरजंग/डा.देवेंद्र सिंह/शिवानंद रमौल)...प.सीता राम
- बिलासपुर प्रजा मंडल की सथापना किस वर्ष हुई...1945-46 ई.मे
- धामी रियासत प्रजा मंडल को किसने संगठित किया...प.सीताराम ने
- 13 जुलाई 1939 को जुब्बल मे हुए पहाड़ी रियासतो के प्रजामण्डलो की कान्फरेंस की अध्यक्षता किसने की...भागमल सौठा
- 1939 मे आल इंडिया स्टेट पीपुल कॉफ्रेस का अध्यक्ष कौन था...जवाहर लाल नेहरू
- शिमला हिल स्टेट मे हिमालयन रियासती प्रजा मंडल का आयोजन कब हुआ...1938 ई.
- प्रजा मंडल सत्याग्रहियो ने 1948 मे सुकेत पहुंचने के लिए किस मार्ग का चयन किया...वाया ततापानी
- हिमालयन रियासती प्रजा मंडल का आयोजन किया गया...दिसम्बर 1939
- “कुनिहार संघर्ष” से किसका नाम जुड़ा है...प.पदमदेव
- धामी त्रासदी के आन्दोलनकर्ताओ का नेता कौन था...भागमल सौठा
- भाई दो न पाई किसका नारा था...प्रजामण्डल का
- हिमालय रियासती प्रजा मंडल की स्थपना 1939 में शिमला में की गयी थी| इसका पहला अध्यक्ष कौन था...प.पदमदेव
- हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी रियासतो के प्रजामण्डल के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में प्रजामंडल सुचारु रूप से चलाने के लिए जनवरी 1946 में किस संस्था की स्थापना की थी...हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल काउंस्लिंग
- धामी रियासत में ‘प्रेम प्रचारणी सभा’ की स्थापना कब हुई थी...1937
- ‘भाई दो पाई’ किसका नारा था...प्रजामण्डल का
- हिमालयन पहाड़ी स्टेट टरेटोरियम काउंसलिंग का मुख्यालय कहाँ सिथत था...शिमला
- सन 1939 में जब पुलिस ने भीड़ पर गोली चलाई तो उस समय आल इंडिया स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष कौन थे...जवाहरलाल नेहरू
- हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल काउन्सिल का गठन किस वर्ष हुआ था...1946 में
- सुकेत सत्याग्रह (18 फरवरी,1948)का नेतृत्ब किसने किया था...प.पदमदेव
- धामी गोली कांड (हिमाचल प्रदेश का पहला गोली कांड)कब हुआ...16जुलाई1939में
- रियासतो के शासको की नरेंद्र मंडल परामशीय संस्था किस वर्ष मेंआई...1921
- किसान सभा के तत्वावधान मेंआरम्भ हुए आंदोलन जिसमें वेद सूरत सिंह और श्री लक्ष्मी सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई...पझौता आंदोलन
- प्रशासन का लोकतांत्रीकरण मुख्य उदेश्य था...प्रजामंडल आंदोलन का


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