हिन्दी भाषा के मुख्य तथ्य - DIGITAL CLASSES BY MR BLOTRA

Breaking

Thursday, 20 August 2020

हिन्दी भाषा के मुख्य तथ्य




हिन्दी भाषा का विकास  









  • भाषा परिवार के आधार पर हिन्दी भारोपीय परिवार की भाषा है| 

  • भारत में 4 भाषा परिवार हैं - भारोपीय, द्रविड़, ऑस्टिक, व् चीनी तिब्बती| 

  • भारतीय आर्यभाषा को तीन कालों में विभक्त किया जाता है| 


    • प्राचीन भारतीय आर्यभाषा ( उदाहरण:- वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत)

    • मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषा (उदाहरण:- पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, अवहट्ट)

    • आधुनिक भारतीय आर्यभाषा (उदाहरण:- बांग्ला, उड़िया, असमिया, मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी आदि| 







हिन्दी का विकास क्रम:




संस्कृत - पाली - प्राकृत - अपभ्रंश - अवहट्ट - प्राचीन/प्रारंभिक हिन्दी 




अपभ्रंश से आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं का विकास-



  • शौरसेनी 


    • पश्चिमी हिन्दी 

    • राजस्थानी 

    • गुजराती 


  • अर्द्धमागधी 


    • पूर्वी हिन्दी 


  • मागधी 


    • बिहारी 

    • उड़िया 

    • बांग्ला 

    • असमिया 


  • खस 


    • पहाड़ी(शौरसेनी से प्रभावित)


  • ब्राचड़ 


    • पंजाबी (शौरसेनी से प्रभावित)

    • सिन्धी 


  • महाराष्ट्री 


    • मराठी 






हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति 


हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति भारत के उत्तर-पश्चिम में प्रवहमान सिंधु नदी से संम्बन्धित है| विदित है कि अधिकांश विदेशी यात्री और आक्रान्ता उत्तर-पश्चिम सिंहद्वार से ही भारत आए| भारत में आने वाले इन विदेशियों ने जिस देश के दर्शन किए वह 'सिंधु' का देश था| ईरान(फारस) के साथ भारत के बहुत प्राचीन काल से ही संबंध थे और ईरानी 'सिंधु' को 'हिन्दु' कहते थे|'हिन्दु' से 'हिन्द' बना और फिर 'हिन्द' में फ़ारसी भाषा के संम्बंध कारक  प्रत्यय 'ई' लगने से हिंदी बन गया| 'हिन्दी' का अर्थ है - 'हिन्दी का'| 





'हिंदी' शब्द का विकास कई चरणों में हुआ -


सिंधु - हिन्दु - हिन्द + ई - हिन्दी| 





'हिन्दी' शब्द के दो अर्थ हैं - 'हिन्द देश के निवासी' (यथा - 'हिन्दी है हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा' - इकबाल) और 'हिन्द की भाषा' | 





धर्म /समाज सुधारकों का योगदान 



  • धर्म /समाज सुधार की प्राय : सभी सस्थाओ ने हिंदी के महत्व को भांपा और हिंदी की हिमायत की। 



  • ब्रहा समाज (1828 ई०) के संस्थापक राजा राम मोहन राय  ने कहा :इस समग्र देश की एकता के लिए हिंदी अनिवार्य है। ब्रहासमाजी केशव चंद्र सेन ने 1875 ई०  में एक लेख लिखा ---'भारतीय एकता कैसे हो,'जिसमे उन्होंने लिखा ;'उपाय है सारे भारत में एक ही भाषा का व्यवहार। अभी जितनी भाषाए भारत में प्रचलित है ,उनमे हिंदी भासा लगभग सभी जगह प्रचलित है। यह हिंदी अगर भारत की एकमात्र भाषा  बनायी  जाए ,तो यह काम सहज ही और शीघ्र  ही सम्पन हो सकता है। एक अन्य ब्रहासमाजी नवीन चंन्द्र राय ने पंजाब में हिंदी के विकास के लिए स्तुत्य योगदान दिया। 



  • आर्य समाज (1875 ई०) के संस्थापक दयानन्द सरस्वती गुजराती भाषी थे एवं गुजराती व संस्कृत के ऐस जानकार थे। हिंदी का सिर्फ उन्हें कामचलाऊ ज्ञान था,पर अपनी बात अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचने के लिय तथा देश की एकता को मजबूत करने के लिए उन्होंने अपना सारा धार्मिक साहित्य हिंदी मे लिखा। उनका कहना था की हिंदी के द्वारा सारे भारत  को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। वे इस 'आर्यभाषा' को सर्वात्मना देशोनंनति का  मुख्य आधार मानते थे। उन्होंने हिंदी के प्रयोग को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। वे कहते थे ,'मेरी आँखे उस दिन को देखना चाहती है जब कश्मीर से कन्याकुमारी तक सब भारतीय एक भाषा बोलने और समझने लग जाये। 

  • अरविंद दर्शन के प्रणेता अरविंद घोष की सलाह थी की 'लोग अपनी -अपनी मातृभाषा की रक्षा  करते हुए सामान्य भाषा के रूप में हिंदी को ग्रहण करें।





  • थियोसोफिकल सोसायटी (1875 ई०) की संचालिका ऐनी बेसेंट ने कहा था ;  'भारतवर्ष के भिन्न भिन्न भागो में जो अनेक देशी भाषाये बोली जाती है ,उनमे एक भाषा  ऐसी है जिसमे शेष सभी भाषाओ की अपेक्षा एक भारी  विशेषता है ,वह यह है कि उसका प्रचार सबसे अधिक है। वह भाषा हिंदी है। हिंदी जाननेवाला आदमी सम्पूर्ण भारतवर्ष में यात्रा क्र सकता है ओर उसे हर जगह हिंदी बोलनेवाले मिल सकते है। ........ भारत के सभी स्कूलों में हिंदी की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। 

  • उपयुक्त धार्मिक / सामाजिक संस्थाओ के अतिरिक्त प्राथना समाज (स्थापना 1867 ई०  संस्थापक --आत्मारंग पाण्डुरंग ,सनातन धर्म सभा (स्थापना 1895 ई० संस्थापक  प० दीनदयाल शर्मा ) ,रामकृष्ण मिशन (स्थापना 1897 ई० संस्थापक --विवेकानंद ) आदि ने हिंदी प्रचार में योग दिया।

  •  इससे लगता है कि धर्म /समाज सुधारको की यह सोच बन चुकी थी कि राष्ट्रीय स्तर पर सवांद स्थापित करने के लिए हिंदी आवश्यक है। वे जानते थे कि हिंदी बहुसंख्यक जन की भाषा है ,एक प्रान्त के लोग दूसरे प्रान्त के लोगो से सिर्फ इसी भाषा  में विचारो का अदन प्रदान क्र सकते है। भावी राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी को बढ़ाने का कार्य इन्ही धर्म /समाज सुधारको ने किया। 






  • कांग्रेस के नेताओं का योगदान 


    • 1885  ई०  में कांग्रेस की स्थापना हुइ। जैसे जैसे कांग्रेस का राष्ट्रीय आंदोलन जोर पकड़ता गया. वैसे वैसे राष्ट्रीयता,राष्ट्रिय झंडा एवं राष्ट्रभाषा के प्रति आग्रह बढ़ता गया। 

    • 1917 ई० मे लोकमान्य बालंगगाधर  तिलक ने कहां : यधपि मैं उन लोगो में से हूँ जो चाहते है ओर जिनका विचार है कि  हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है।' तिलक ने भारतवासियो से आग्रह किया कि हिंदी सीखे। 

    • महात्मा गाँधी राष्ट्र के लिए राष्ट्रभाषा को नितांत आवश्यक मानते थे।  उनका कहना था ;  'राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गुंगा है। गाँधी जी हिंदी के प्रश्न को स्वराज का प्रश्न मानते थे : 'हिन्दी का प्रश्न स्वराज का प्रश्न है।उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में सामने रखकर भाषा -समस्या पर गंभीरता से विचार किया। 1917 ई० भड़ोोंच में आयोजित गुजरात शिक्षा परिषद् के अधिवेशन में सभापति पद से भाषण हुए गांधी जी ने कहा : 









राष्ट्रभाषा के लिए 5 लक्षण या शर्तें होनी चाहिए






  1. अमलदारो (राजकीय अधिकारियो )के लिए वह भाषा सरल होनी चाहिए। 

  2. यह जरूरी है कि भारतवर्ष के बहुत से लोग उस भाषा को बोलते हो। 

  3. उस भाषा के द्वारा  भारतवर्ष का अपनी धार्मिक ,आर्थिक ओर राजनैतिक व्यवहार हो सकना चाहिए। 

  4. राष्ट्र के लिए वो भाषा आसान होनी चाहिए। 

  5. उस भाषा का विचार करते समय किसी क्षणिक या अल्पस्थायी स्थिति पर जोर नहीं देना चाहिए।

स्वतंत्रता के बाद हिंदी
का राजभाषा के रूप में विकास
  1. राजभाषा का शाब्दिक अर्थ
    है - राज-काज की भाषा
    | जो भाषा देश के
    राजकीय कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है
    , वह 'राजभाषा' कहलाती है | राजाओं-नवाबों के जमाने में इसे 'दरबारी भाषा' कहा जाता था |
  2. राजभाषा सरकारी काम-काज
    चलाने की आवश्यकता की उपज होती है
    |
  3. स्वशासन आने के पश्चात
    राजभाषा की आवश्यकता होती है| प्रायः राष्ट्रभाषा ही स्वशासन आने के पश्चात
    राजभाषा बन जाती है| भारत में भी राष्ट्रभाषा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त
    हुआ| 
  4. राजभाषा एक संवैधानिक
    शब्द है| हिंदी को 14सितम्बर 1949 ई० को संवैधानिक रूप से राजभाषा घोषित किया
    गया| इसीलिए 
    प्रत्येक वर्ष 14सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है| 
  5. राजभाषा देश को अपने प्रशासनिक लक्ष्यों के द्वारा राजनीतिक-आर्थिक इकाई में जोड़ने का काम करती है| अर्थात राजभाषा की प्राथमिक शर्त राजनितिक प्रशासनिक एकता कायम करना है| 
  6. राजभाषा का प्रयोग
    क्षेत्र सिमित होता है
    , यथा : वर्तमान
    समय में भारत सरकार के कार्यालयों एवं कुछ राज्यों - हिंदी क्षेत्र के राज्यों -में
    राज-काज हिंदी में होता है
    | अन्य राज्य सरकारें
    अपनी-अपनी भाषा में कार्य करती है| 
  7. राजभाषा कोई भी बहस हो
    सकती है है स्वभाषा या परभाषा |जैसे , मुग़ल शासक अकबर के समय से लेकर मैकाले के काल
    तक फारसी राजभाषा तथा मैकाले के काल से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक अंग्रेजी राजभाषा
    थी जो की विदेशी भाषा थी
    | जबकि स्वतंत्रता
    प्राप्ति के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया जो की स्वभाष है
    |
  8. राजभाषा का एक निश्चित मानक स्वरूप होता है जिसके साथ छेढ़छाड़ या
    प्रयोग नहीं किया जा सकता
    |

वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

  1. हिंदी किस भाषा-परिवार की भाषा है....भारोपीय 
  2. भारत में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा कौन-सी है....हिंदी 
  3. हिंदी भाषा का जन्म कहाँ से हुआ है....अपभ्रंश  से 
  4. कौन सी बोली अथवा भाषा हिंदी के अंतर्गत नहीं आती है...तेलगु 
  5. हिंदी की विशिष्ट बोली ब्रजभाषा किस रूप में सबसे अधिक प्रसिद्ध  है....काव्यभाषा   
  6. भारतवर्ष में हिंदी को आप किस वर्ग में रखेंगे...राजभाषा 
  7. 'ढूढाड़ी' बोली है --  पूर्वी राजस्थान की 
  8. 'ब्रजबुलि' नाम से जानी जाती है....पुरानी बांग्ला 
  9. कौन-सी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है....मराठी
  10. कौन सी भाषा संस्कृत भाषा की अपभ्रंश है....पाली              
  11. अधिकतर भारतीय भाषाओँ का विकास किस लिपि से हुआ....ब्राह्मि लिपि 
  12. हिन्दी भाषा किस लिपि में लिखी जाती है....देवनागरी 
  13. वर्तमान हिन्दी का प्रचलित रूप  है....खड़ी बोली 
  14. हिन्दी भाषा की बोलियों के वर्गीकरण के आधार पर छत्तीसगढ़ी बोली है -पूर्वी हिन्दी 
  15. कौन-सी पश्चमी हिन्दी की बोली नहीं है....बघेली 
  16. भारतीय संविधान में किन अनुच्छेदों में राजभाषा संबंधी प्रावधानों का उल्लेख है....343-351तक 
  17. दक्षिणी भारत हिन्दी प्रचार सभा का मुख्यालय कहाँ पर स्थित है....चेन्नई 
  18. हिन्दी भाषा के विकास का सही अनुक्रम कौन-सा है....प्रालि-प्राकृत-अपभृंश-हिन्दी 
  19. संविधान के अनुछेद 351 में किस विषय का वर्णन है....हिन्दी के विकास के लिए निर्देश 
  20. 'ब्रजभाषा' है....पश्चमी हिन्दी 
  21. 'मगही' किस उपभाषा की बोली है....बिहारी 
  22. हिन्दी खड़ी बोली किस उपभृंश से विकसित हुई.....शौरसेनी 
  23. भाषा के आधार पर भारतीय राज्यों की पुनः संरचना की गयी थी...1956ई में 
  24. भाषायी आधार पर सर्वप्रथम किस राज्य का गठन हुआ...आंध्र प्रदेश 
  25. 'बघेली' बोली का संभंध किस उपभाषा से है...पूर्वी हिंदी  
  26. किस तिथि को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया गया...14 सितम्बर 1949 
  27. भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषओं की संख्या है...22
  28. हिंदी की आदि जननी है... संस्कृत
  29. कौन भारोपीय परिवार की भाषा नहीं है... मलयालम 
  30. पश्चमी हिंदी की दो बोलियों का सही युग्म है...खडी बोली - बुंदेली
























No comments:

Post a Comment