सिख साम्राज्य एवं पहाड़ी राज्य
जस्सा सिंह रामगढ़िया -
बंदा बहादुर की मृत्यु के बाद सिख 12 मिशलों में संगठित हुए| मिशलों के सरदारों में जस्सा सिंह रामगढ़िया पहला सिख सरदार था|
जयसिंह कन्हैया और संसारचंद -
1781-82 में मिशल के सरदार जयसिंह कन्हैया की सहायता पाकर संसारचंद ने नगरकोट के किले को घेर लिया| किले के अंतिम किलेदार नवाब सैफ अली खान ने केहलूर की रानी से मदद मांगी| लेकिन 1783 ई. में नवाब सैफ अली खान की मृत्यु के पश्चात उसके सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर किला खाली कर दिया|
रणजीत सिंह और संसारचंद -
संसारचंद के केहलूर(बिलासपुर) पर आकर्मण के पश्चात् केहलूर के राजा महानचन्द ने गोरखा कमाण्डर अमरसिंह थापा को 1804 ई. में सहायता के लिए बुलाया| अमर सिंह थापा ने 1806 ई. को महालमोरियों में संसारचंद को हराया| संसारचंद ने भागकर काँगड़ा किले में शरण ली| संसारचंद ने रणजीत सिंह से सहायता माँगी| संसारचंद और महाराजा रणजीत सिंह के बीच ज्वालामुखी मंदिर में 1809 में ज्वालामुखी की संधि हुई जिसके अनुसार गोरखों को हारने के बदले संसारचंद नें महाराजा रणजीत सिंह को काँगड़ा किला और 66 गांव देने का निर्णय लिया| महाराजा रणजीत सिंह ने अमर सिंह थापा को हरा दिया| संसारचंद नें काँगड़ा किला और 66 गांव रणजीत सिंह को सौंप दिए| महाराजा रणजीत सिंह ने देसा सिंह मझीठिया को काँगड़ा किले का पहला सिख किलेदार व पहाड़ी रियासतों का गवर्नर बनाया| रणजीत सिंह ने ज्वालामुखी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान किया व सोने का छत्र भी चढ़ाया| संसारचंद की 1823 ई. में मृत्यृ हो गयी|
रणजीत सिंह और अनिरुद्ध चंद -
संसारचंद की मृत्यु के बाद 1823 ई. में एक लाख नजराना रणजीत सिंह को देकर अनिरुद्ध चंद(संसारचंद का पुत्र) गददी पर बैठा|
जनरल वैंचुरा(1840 ई. - 1841 ई.) -
सिख सेना के जनरल वैंचुरा के नेतृत्व में 1840 ई. में सेना कुल्लू और मंडी की और बढ़ी| कुल्लू के राजा ने आत्मसमर्पण कर दिया| मंडी के राजा बलवीर सेन जो एक रखैल का पुत्र था, उसे कैद कर अमृतसर भेज दिया गया|
प्रथम आंग्ल - सिख युद्ध(1845 - 46 ई.) -
महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद 1845 - 46 ई. में सिखों और अंग्रेजों के मध्य एक भयंकर युद्ध हुआ| लॉर्ड होर्डिंग प्रथम इस समय भारत के गवर्नर जनरल थे| प्रथम सिख युद्ध की समाप्ति के बाद 9 मार्च, 1846 ई. को लाहौर की संधि हुई|
द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध(1848 - 49 ई.)
युद्ध की घटनाएँ -
- अँग्रेज सेनापति लार्ड गफ़ और सिख सरदार शेरसिंह के बीच 22 नवंबर, 1848 ई. को रामनगर की लड़ाई हुई जिसमें हार जीत का फैसला नहीं हुआ|
- 13 जनवरी 1949 ई. को चिलियांवाला की लड़ाई में दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ| अंग्रेजों ने लार्ड गफ के स्थान पर चार्ल्स नेपियर को कमाण्डर बनाकर भेजा|
- लार्ड गफ ने चार्ल्स नेपियर के पहुंचने से पहले गुजरात की लड़ाई(21 फरवरी 1849) में सिखों को हरा दिया| इस युद्ध को 'तोपों' का युद्ध भी कहते हैं|
युद्ध का परिणाम -
- सिख साम्राज्य को 29 मार्च, 1949 ई. को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया|
- महाराजा दिलीप सिंह को 50 हजार पौण्ड वार्षिक पेंशन पर इंग्लैंड भेज दिया गया|
गोरखा आकर्मण
गोरखा आकर्मण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र विस्तार था|
गोरखों को निमंत्रण -
1804 ई. में अमर सिंह थापा ने गढ़वाल पर कब्ज़ा कर लिया| केहलूर के राजा महानचन्द ने अमर सिंह थापा को संसारचंद और हिन्डूर के राजा के विरुद्ध अपनी मदद के लिए बुलाया| सिरमौर के राजा कर्मप्रकाश ने हिन्डूर एवं अपने भाई कँवर रतन सिंह के विरुद्ध अमर सिंह थापा को मदद के लिए बुलाया | अमर सिंह थापा ने रतन सिंह को मार दिया | अमर सिंह थापा के पुत्र रंजौर सिंह ने कर्म प्रकाश को हराकर सिरमौर रियासत पर कब्ज़ा कर लिया | कर्म प्रकाश ने अम्बाला के भूरिया में शरण ली |
पहाड़ी राज्यों पर गोरखों का अधिकार -
सिरमौर रियासत पर कब्जे के बाद गोरखों ने अजीमगढ़ में हिन्डूर सेना को हराया| राजा रामशरण सिंह दक्षिण में कालसी की ओर भाग गया| अमर सिंह थापा ने 1810 में हिन्डूर, पुण्डर, जुब्बल और धामी को अपने अधीन कर लिया| गोरखों ने 1806 में महलमोरियों में संसारचंद को हराया और काँगड़ा किले में छिपने पर मजबूर कर दिया| अमर सिंह थापा ने बाघल के अर्की में अपना मुख्यालय स्थापित किया| अर्की का राजा जगत सिंह वनवास चला गया था| मई 1811 ई. में अमरसिंह थापा ने बुशहर को हराकर ठियोग, बलसन, कोटगढ़, जुब्बल और रामपुर पर अधिकार कर लिया| बुशहर के राजा उग्रसिंह की अचानक मृत्यु हो गयी| अमरसिंह थापा ने 12000 रूपए वार्षिक कर के बदले बुशहर के नाबालिग राजा मोहिंदर सिंह को सराहन के आगे का प्रदेश सौंप दिया और स्वयं अर्की लौट आया|
गोरखा - ब्रिटिश युद्ध -
1 नवंबर, 1814ई. को अंग्रेजों ने गोरखों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया जिसमें पहाड़ी राजाओं ने अंग्रेजों का साथ दिया| अंग्रेजों की चार टुकड़ियाँ बनीं - गिलेस्पी, मार्टिनडेल, विलियम फ्रेजर और ऑक्टरलोनी ने इन टुकड़ियों का नेतृत्व किया|
सुगौली की संधि(1815ई.) -
सुगौली की संधि (28 नवंबर, 1815ई.) द्वारा गोरखा ब्रिटिश युद्ध की समाप्ति हुई तथा गोरखों ने वापिस नेपाल जाना स्वीकार कर लिया| इस संधि द्वारा दोनों राज्यों की सीमाएं निश्चित हो गईं| नेपाल के सिक्किम राज्य के समस्त अधिकार वापिस ले लिए गए| अंग्रेजों को काली नदी से सतलुज के बीच के गढ़वाल, कुमायूं, शिमला पहाड़ी रियासत एवं तराई के अधिकाँश भाग प्राप्त हुए| नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक अंग्रेज रेजिडेंट रखा गया| गोरखों ने 1816 ई. में सुगौली की संधि की शर्तों को स्वीकार किया|
हिमाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास से संबधित महत्वपुर्ण प्रश्न उत्तर
- महाराजा रणजीत सिंह ने किस वर्ष संसारचंद से काँगड़ा किला प्राप्त किया...1809ई.
- सन 1770ई. मे राजा घमण्डचद को अपने साम्राज्य का विस्तार करने से उसे हराकर किसने रोका था...जस्सा सिंह रामगढ़िया
- राजा संसारचंद की हिमाचल प्रदेश मे एक स्वतत्र हिन्दू राज्य के गठन की महत्वकाँक्षा को किसने रोका था...महाराजा रणजीत सिंह
- राजा संसारचंद और रामगढ़िया सरदार जयसिंह के बीच काँगड़ा के किले पर अधिकार को लेकर चल रहे विवाद को किसने मध्यस्थ्ता की थी...महाराजा रणजीत सिंह
- 12 मिशलो मे विभाजित किस सिख ने हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से (काँगड़ा) पर 1809 ई. मे राज किया... महाराजा रणजीत सिंह (देसा सिंह मजीठिया)
- सतलुज नदी के दक्षिण के सभी पहाड़ी क्षेत्रों को सिखो ने ब्रिटिशरो को किस संधि के द्वारा सौंपा था...लाहौर की संधि (1846 ई.)
- काँगड़ा किला और सधांता जिले को लाहौर (सिखो)को देने वाली ज्वालामुखी संधि महाराजा रणजीत सिंह और संसारचंद के बीच किस विक्रमी सवत को हुई थी...विक्रमी 1866 ई. श्रावण 5 को (1809 ई.)
- किस रियासत का राजा सन 1840ई. के आसपास सिखों की सेना के आकर्मण से बचने के लिए पहाड़ों की ओर भाग गया था...कुल्लू
- 1840ई. के आसपास सुकेत ओर मंडी रियासतों के विरुद्ध किसने सिख सेना का नेतृत्व किया...जनरल वेंचुरा
- महाराजा रणजीत सिंह ने राजा रणवीर चंद को 1846ई के आसपास कौन सी जागीर प्रदान की थी...महलमोरियों
- जयसिंह कन्हैया ने किस वर्ष जस्सा सिंह रामगढ़िया को पराजित कर काँगड़ा पर कब्ज़ा किया...1775ई.
- द्तारपुर रियासत किस वर्ष महाराजा रणजीत सिंह के अधीन आयी...1809 AD
- किस मुख्य मांग की वजह से महाराजा रणजीत सिंह और काँगड़ा के राजा अनिरुद्ध चंद के बीच संबन्धों में कड़वाहट पैदा हुई...अनिरुद्ध चंद की बहन के विवाह ध्यान सिंह के पुत्र से करने की मांग
- किस रियासत के राजा को 1840ई के आसपास सिख सेना ने बंदी बना लिया...मंडी
- राजा संसारचंद ने काँगड़ा किला और 66 गावों को महाराजा रणजीत सिंह को क्यों सौंप दिया...गोरखाओं को हारने के समय पर मदद करने के लिए
- किस वर्ष में सिख जनरल ज़ोरावर सिंह ने अपने सिख राज्य मे लाहौल स्पीति के क्षेत्र को मिला लिया...1842ई.
- गोरखाओं को पराजित करने के बाद महाराजा रणजीत सिंह द्वारा नियुक्त किए काँगड़ा हिल के प्रथम नाज़िम या राज्यपाल कौन थे...देसा सिंह मजीठिया
- महाराजा संसारचंद की मृत्यु कब हुई...1823ई.
- 1805ई. में गोरखा सेना का नेतृत्व किसने किया जिसने काँगड़ा पर आकर्मण किया था...अमर सिंह थापा
- गोरखों और ब्रिटिश के बीच सुगौली के संधि पर किस वर्ष हस्ताक्षर हुए...1815ई.में
- चौपाल, जुब्बल और रावीगढ क्षेत्रों में गोरखों के विरुद्ध अभियान का नेतृत्व किसने किया...जेम्स वेल्ली फ़्रेज़र
- बिलासपुर के किस राजा ने काँगड़ा के राजा संसारचंद के विरुद्ध सहायता के लिए गोरखाओं को निमंत्रण दिया... महानचंद
- मई 1815ई. में किस किले के पास अंग्रेजों और गोरखों में युद्ध हुआ जिसमे भक्ति थापा मारा गया...मलौण
- महलमोरियाँ नामक ऐतिहासिक स्थल, जहाँ राजा संसारचंद एवं गोरखों के बीच युद्ध हुआ था, कहाँ स्थित है...हमीरपुर
- 1804ई. में जब गोरखाओं ने काँगड़ा पर आकर्मण किया तो उस समय जसवान का राजा कौन था...उमेदचंद
- उन्नीसवी सदी के प्रारंभ मे अनेक पहाड़ी रियासतो पर आक्रमण करने वाली गोरखा सेना का नेतृत्व किसने किया...अमर सिंह थापा
- कौन-सी संधि शिमला की पहाड़ी रियासतो के राजनैतिक पटल से गोरखों की रवानगी और अंग्रजो के आगमन का संकेत देती है... संगौली की संधि
- सन 1805 मे हमीरपुर के पास काँगड़ा के संसार चंद को किस गोरखा नेता ने हराया...अमर सिंह थापा
- सन 1805 मे अमर सिंह थापा ने संसारचंद को किस स्थान पर हराया...महलमोरियाँ
- बिलासपुर रियासत पर कब तक गोरखाओ का अधिकार रहा था...1814 तक
- उन्नीसवीं सदी की पहली चौथाई के दौरान गोरखा और अंग्रेजों के मध्य किस स्थान पर निर्णायक युद्ध हुआ...जातक हिल्स
- सन 1804 ई. मे बिलासपुर,मंडी,चम्बा के शासकों और काँगड़ा जिले के छोटे राजाओं ने काँगड़ा को जीतने के लिए किसे आमंत्रित किया...गोरखा सेनाध्यक्ष अमर सिंह थापा
- 1814-15 ई. के आसपास गोरखों और बुशहर रियासत के बीच निर्णायक लड़ाई जिसमे गोरखाओं को भगा दिया गया कहाँ हुयी थी...चिड़गांव
- 'हाटू किला' हिमाचल प्रदेश मे किस क्षैत्र मे स्थित है... शिमला
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