हिमाचल प्रदेश में 1857 ई. का विद्रोह - DIGITAL CLASSES BY MR BLOTRA

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Saturday, 9 May 2020

हिमाचल प्रदेश में 1857 ई. का विद्रोह





हिमाचल प्रदेश में 1857ई. का विद्रोह



हिमाचल प्रदेश में 1857ई. के विद्रोह से पूर्व की घटना :-


नूरपुर के वज़ीर राम सिंह पठानिया अँग्रेजों के लिए टेढ़ी खीर साबित हुए| उन्हें शाहपुर के पास "डाले की धार" में अँग्रेजों ने हराया| उन्हें एक ब्राह्मण पहाडचंद ने धोखा दिया| वजीर राम सिंह पठानिया को सिंगापुर भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्र्यु हो गयी| हि.प्र. में कम्पनी सरकार के विरुद्ध विद्रोह की पहली चिंगारी 20 अप्रैल, 1857ई. में कसौली सैनिक छावनी में भड़की जब अम्बाला राइफल डिपो के 6 देशी सैनिकों ने एक पुलिस चौकी को आग लगा दी|




1857 ई. का विद्रोह
1857 ई. का विद्रोह






शिमला क्षेत्र में 1857ई. के विद्रोह की क्रान्ति की शुरुआत :- 


11 मई, 1857ई. को मेरठ, अम्बाला और दिल्ली के विद्रोह और कत्लेआम का समाचार शिमला पहुँचा| ब्रिटिश सेना के कमांडर इन चीफ जनरल जॉर्ज एनसन ने जतोग, सपाटू, ढगशाई और कसौली की सैनिक छावनियों के सैनिक को अम्बाला कूच करने के आदेश दिए और स्वयं भी हड़भड़ाहट में अम्बाला की ओर निकल पड़े|




भीम सिंह के नेतृत्व में नसीरी बटालियन द्वारा विद्रोह:- 


जतोग में तैनात "नसीरी बटालियन"(गोरखा रेजिमेंट) ने देशी सेना के सूबेदार भीम सिंह ने नेतृत्व में जतोग छावनी और ख़जाने पर कब्ज़ा कर लिया| 24 मई, 1857ई. जतोग की क्रांतिकारी नसीरी सेना ने सूबेदार भीम सिंह के नेतृत्व में बैठक का आयोजन कर कप्तान डेविड ब्रिग्ज(हिंदुस्तान तिब्बत सड़क के सुपरिन्टेन्डेन्ट) और डिप्टी कमिशनर विलियम हे के प्रस्ताव पर विचार किया| रामप्रसाद वैरागी - शिमला में गुप्त संगठन अँग्रेजों के विरुद्ध कार्य कर रहा था जिसके नेता थे राम प्रसाद वैरागी| राम प्रसाद वैरागी को गिरफ्तार कर अम्बाला जेल ले जाया गया और वहाँ उसे फाँसी दे दी| 




बुशहर रियासत का रुख:-


बुशहर रियासत ने 1857ई. के विद्रोह  के समय अँग्रेजों का साथ नहीं दिया| बुशहर के राजा शमशेर सिंह ने अँग्रेजों को 15000 रूपए वार्षिक नजराना देना बंद कर दिया तथा उन्हें किसी भी प्रकार की आर्थिक एवं सैनिक सहायता प्रदान नहीं की और रियासत को स्वतंत्र घोषित कर दिया| शिमला के डिप्टी कमिशनर विलियम हे और पहाड़ी रियासतों के पोलिटिकल एजेंट बुशहर के राजा  विरुद्ध कार्रवाही  चाहते थे परन्तु  की कमी और हिंदुस्तान तिब्बत सड़क के निर्माण की वजह से राजा के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर सके|




कुल्लू क्षेत्र में बग़ावत:- 


कुल्लू क्षेत्र में जनक्रांति की योजना  नेतृत्व स्थानीय युवराज प्रताप सिंह(कुल्लू के राजा किशन सिंह के पुत्र) ने किया| उसने 16 मई, 1857 ई. में सारे सिराज क्षेत्र में आज़ादी की भावना जागृत की जिसमें उनका मुख्य सलाहकार व् सहयोगी उनका साला मियाँ वीर सिंह (बैजनाथ, काँगड़ा का निवासी) था| प्रताप सिंह और उसके साथी वीर सिंह को गिरफ्तार कर धर्मशाला में 3 अगस्त, 1857 ई. को फाँसी दे दी गयी|




चम्बा रियासत:-


चम्बा के नागरिकों ने 1857 ई. के विद्रोह  में सक्रिय भाग नहीं लिया| चम्बा के राजा श्री सिंह ब्रिटिश सरकार के वफ़ादार बने रहे| ब्रिटिश राजनितिक एजेंट और पंजाब के चीफ कमिशनर, जॉन लॉरेंस के आदेश पर 16 मई, 1857 ई. से रियासत के सभी मुख्य मार्गों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया| जालंधर में 36-नेटिव इन्फेंट्री और 61-नेटिव इन्फेंट्री के विद्रोह से डलहौज़ी में बसे अंग्रेज भयभीत हो गए| कुछ महिलाओं और बच्चों ने चम्बा के राजा के पास शरण ली| डलहौज़ी की सुरक्षा के लिए मियाँ अतर सिंह के नेतृत्व में एक सैनिक टुकड़ी भेजी गई|




मंडी रियासत:-


1857ई. के विद्रोह  समय मंडी रियासत के राजा विजय सेन केवल दस वर्ष के थे| अंग्रेज़ों ने वज़ीर गोसाऊँ को मंडी स्टेट का वजीर व् प्रशासक बनाया| अंग्रेजों के वफ़ादार वज़ीर गोसाऊँ ने विद्रोह को भड़कने से पहले ही दबा दिया|




1857 के बाद हि.प्र. में संवैधानिक एवं प्रशासनिक विकास:- 


1857ई. की क्रान्ति के बाद हिमाचल एवं समस्त 'भारत में भारत सरकार अधिनियम, 1858' लागु किया गया| 1 नवंबर, 1858 को महारानी विक्टोरिया घोषणा पत्र की घोषणा लार्ड कैनिंग ने इलाहाबाद में की| शिमला में भी इसका प्रकाशन हुआ तथा शहर के मुख्य स्थानों पर इसे चिपकाया गया|




दिल्ली दरबार:-


1877 ई. में लार्ड लिटन के कार्यकाल में दिल्ली दरबार का  आयोजन किया गया| इसमें चम्बा के राजा श्याम सिंह, मंडी के राजा विजाई सेन और बिलासपुर के राजा हीराचंद ने भाग लिया| 1911 में दिल्ली को कोलकाता के स्थान पर भारत की राजधानी बनाया गया| इस अवसर पर दिल्ली में दरबार लगाया गया| इस दरबार में सिरमौर के राजा अमर प्रकाश, बिलासपुर के राजा अमर चाँद, क्योंथल के राजा विजाई सेन, सुकेत के राजा भीमसेन, चम्बा के राजा भूरी सिंह, बघात के राजा दीप सिंह और जुब्बल के राजा भगत चंद ने भाग लिया|






1857ई. के विद्रोह से related कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न



  • कालका के निकट वह कौन-सा पर्वतीय स्थल था जहाँ पर 19वी. शताब्दी के प्रारंभ मे अंग्रेज राजनैतिक प्रतिनिधि ने रहना प्रारंभ किया था...स्बाथू

  • काँगड़ा, कुल्लू और लाहुल-स्पीति क्षेत्र को कब अंग्रेज शासको ने एक जिले के रूप मे संगठित किया...1846 ई.(16 मार्च)

  • किस संधि द्वारा ब्रिटिश सरकार ने लाहुल को 'ब्रिटिश लाहुल’ और ‘चम्बा लाहुल’ में बाँट दिया था... अमृतसर संधि (16 मार्च, 1846) 

  • गोरखों एवं ब्रिटिश के बीच संगोली की संधि किस वर्ष हुई...1815में

  • सन 1846 में लाहौर की संधि के पश्चात् किस ब्रिटिश गवर्नर जनरल ने काँगड़ा व् मंडी समेत अनेक हिमाचली पर्वतीय रियासतों पर अधिकार कर लिए था...लार्ड डलहौज़ी

  • किस अंग्रेज सेनापति ने गोरखों को हराकर उन्हें 1815 में सुगौल की संधि करने पर विवश किया...डेविड ऑक्टरलोनी 

  • 1848ई. के लगभग ब्रिटिशों के खिलाफ काँगड़ा ग्रुप ऑफ़ स्टेट्स की कौन सी देशी रियासत उपद्रव में उठ कड़ी हुई...नूरपुर

  • जिन ब्रिटिशर्स की 1814 - 1815 के एंग्लो गोरखा युद्ध में मौत हुई उनकी कब्रें किस स्थान पर हैं...लोहार घाटी

  • अंग्रेजों की पहली नासिरी बटालियन में कौन थे...गोरखा

  • अंग्रेजों ने सतलुज नदी की दाहिनी तरफ की पहाड़ी रियासतों को पंजाब हील स्टेट और बाएं तरफ की पहाड़ी रियासतों को शिमला हील स्टेट का नाम दिया? कौन सी रियासत इस बंटवारे के अंतर्गत दोनों केटेगरी में शामिल नहीं हो रही थी क्योंकि सतलुज नदी इस रियासत को बीच में सी दो बराबर भागों में बांटती थी...केहलूर

  • किस वर्ष व्यास और सतलुज के बीच के क्षेत्रों की प्रभुसत्ता ब्रिटिश सरकार के अधीन आ गई...1846 में

  • भारत के किस गवर्नर जनरल ने काँगड़ा के राजा रणवीर चंद को महाराजा रणजीत सिंह से अपने राज्य के कुछ भाग पर अधिकार करने में मदद की थी...लार्ड विलियम बेंटिक 

  • ब्रिटिश सरकार किसके माध्यम से रियासतों पर अपना नियंत्रण रखती थी...पोलिटिकल एजेंट, रेजिमेंट कमिशनर, सुपरिन्टेन्डेन्ट| 

  • 'शिमला घोषणापत्र’ के माध्यम से ब्रिटिश सरकार द्वारा क्या कदम उठाया गया...अफ़ग़ानिस्तान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा     

  • किस वाइसराय ने ब्रिटिश सरकार की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में शिमला के चयन के इन शब्दों में समर्थन किया था - 'यह भारत में एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ एक वाइसराय स्वयं को दफ्तरी ताम-झाम से  मुक्त रह सकता है...लार्ड कर्ज़न

  • नाल-देहरा  की प्राकृतिक सुषमा से अभिभूत होकर एक ब्रिटिश वाइसराय ने अपनी बेटी का नामकरण वहीँ कर दिया था...लार्ड कर्जन  

  • देशी राज्यों के अंत के सिद्धांत की रचना किस गवर्नर जनरल की थी...लार्ड डलहौज़ी

  • यह किसने कहा 'मैं और चीन के राजा दुनिया के आधे लोगों पर राज करते हैं, फिर भी हमें सुबह नाश्ते का टाइम मिल जाता है'...लार्ड एमहरेस्ट       

  • कोटखाई को किस वर्ष ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाया गया...1846 में       

  • यूरोपीय यात्री मूरक्राफ्ट ने हिमाचल प्रदेश का भ्रमण कब किया...1820 – 1822 

  • किसको गवर्नर जनरल लार्ड डलहौज़ी के शासनकाल में अपनी देशी रियासत को स्वतंत्र घोषित करने पर सिंगापुर में निर्वासित किया गया था...वजीर रामसिंह पठानिआ    

  • क्योंथल के राणा को किस वर्ष ब्रिटिश सरकार द्वारा राजा की उपाधि दी गयी...1857 में

  • लाम्बागरां के जागीरदार को राजा की उपाधि किस वर्ष प्रदान की गयी...1909 में   

  • सिरमौर के राजा को 1815 ई में दी गयी सनद के अनुसार कौन सा क्षेत्र उसे लौटा दिया गया...कयार - दा – दून            

  • ब्रिटिश सरकार से सनद प्राप्त करने वाली अंतिम ठुकराई कौन थी...थरोच

  • 1857 ई. के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हिमाचल प्रदेश की किस देशी रियासत ने अंग्रेज शासको का साथ नहीं दिया था...रामपुर बुशहर           

  • 1857 ई की क्रांति के समय केहलूर का राजा कौन था...हीराचंद      

  • हिमाचल प्रदेश में 1857 ई की क्रांति कहाँ से शुरू हुई...कसौली सैनिक छावनी

  • कुल्लू के किस देशभक्त नेता ने 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया जिसके बाद उसे उसके सलाहकार वीर सिंह सहित फांसी दी गयी...प्रताप सिंह    

  • क्योंथल के शासक को ‘राणा’ से ‘राजा’ का ख़िताब कब प्रदान किया गया...1857 ई            

  • हिमाचल प्रदेश में विद्रोह के समय किन छावनियों ने सुरक्षा प्रदान की थी...डगशाई, स्बाथू  और कसौली छावनी              

  • जतोग विद्रोह का नेतृत्व किसने किया...भीम सिंह 

  • किस एकमात्र पहाड़ी शासक ने 1857 ई की क्रांति के दौरान ब्रिटिश सरकार को सैन्य व् वित्तीय सहायता नहीं दी...बुशहर का शासक  

  • 1857 ई में शिमला का उपायुक्त बुशहर के खिलाफ कार्यवाही करना चाहता था, किन्तु मुख्य आयुक्त ने उसे ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि...इस कदम से भारत- तिब्बत सड़क निर्माण में बाधा आ सकती थी

  • 1857ई. की महान क्रांति के दौरान बुशहर राज्य का शासक कौन था, जिसने ब्रिटिशों के विरुद्ध क्रांति में हिस्सा लिया...राजा शमशेर सिंह     

  • 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध उठ खड़े होने के लिए जनता को प्रेरित करने वाले जननायक प्रताप सिंह की शहादत कहाँ हुई थी...धर्मशाला     

  • सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में किस देशी रियासत ने तटस्थता का दृष्टिकोण अपनाया( न अंग्रेजों का, न विद्रोहियों का साथ दिया)...रामपुर बुशहर  

  • निम्नलिखित राजसी मुखियाओं मे से कौन 1857 ई. में अँग्रेजों के साथ रहा...राम सिंह      

  • कुल्लू के किस शासक को 1857 ईस्वी की क्रांति के समय राय की उपादि दी गयी थी...ज्ञान सिंह          

  • 1848 ई. मे नूरपुर के बजीर और उसके बाद परमोद चंद एवं जसवान तथा दातरपुर के राजाओ के विद्रोह को किसने दबाया...मि.लारेन्स      

  • किन दो ठकुराइयो को 1896 ई. मे जुबल रियासत के अधीन कर दिया गया... रावीगढ और डाढ़ी

  • 1857 के सैन्य विद्रोह के दौरान बुशहर रियासत के किस राजा ने अंग्रेजो के साथ प्रतिकूल व्यवहार किया... शमशेर सिंह 

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