हिमाचल प्रदेश से जुड़े राष्ट्रिय आंदोलन
पजौता किसान आंदोलन:-
1942 -43 ई. में सिरमौर के ऊपरी क्षेत्र पजौता के लोगों ने अपनी शिकायतों को लेकर एक किसान आंदोलन चलाया| इस समय दूसरा विश्वयुद्ध जोरों पर था| उधर बंगाल में अकाल पड़ा हुआ था| इसलिए रियासती सरकार ने किसानों पर रियासत से बाहर अनाज भेजने पर रोक लगा दी जहाँ उन्हें बेचने पर अच्छे मूल्य मिलते थे| किसानों को यह आदेश भी दिया गया कि वे लोग अपने पास थोड़ा अन्न रखकर शेष अन्न सरकारी को-ऑपरेटिव सोइटियों को बेच दें| राज्य में घराट, रीत विवाह कर आदि अनुचित कर लगाए गए थे| कर्मचारी लोगों से अधिक बेगार लेने लगे| पजौता के गॉव टपरोली में अक्टूबर, 1942 को किसान एकत्रित हुए और स्थिति से निपटने के लिए "पजौता किसान सभा" का गठन किया| इसके प्रधान लक्ष्मी सिंह, गांव कोटला तथा सचिव वैद्य सूरत सिंह चुने गए| इसके अतिरिक्त टपरोली गांव के मियां गुलाब सिंह और अतर सिंह, जड़ोल के चूं-चूं मियां, पैणकुफर के मेहर सिंह, धामला के मदन सिंह, वघोट के जालम सिंह, नेरी के कालीराम शावणी आदि-आदि|
कुछ समय के पश्चात् लक्ष्मी सिंह प्रधान के स्थान पर धामला गांव के मदन सिंह को प्रधान बना दिया गया| इस आंदोलन का समूचा नियंत्रण व संचालन वैद्य सूरत सिंह के हाथ में था| उसने राजा राजेन्द्र प्रकाश को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वह स्वयं लोगों की परेशानियां जानने के लिए इलाके का दौरा करें| सिरमौर नरेश राजेंद्र प्रकाश कर्मचारियों की चापलूसी पर आश्रित था| कर्मचारियों ने राजा को लोगों से मिलने नहीं दिया| अतः राजा ने पुलिस अधिकारी के संचालन में पुलिस गांव धामला, हब्बान भेज दीं| वह आंदोलन को दबा न सकी|
इसके पश्चात् समूचा पजौता क्षेत्र सैनिक शासन के अधीन कर दिया गया| दो मास तक लोग बराबर 'मार्शल लॉ' के अधीन आंदोलन करते रहे| इसी दौरान कमना नामक एक व्यक्ति की गोली मार लगने से मृत्यु हो गयी| दो मास के पश्चात् सैनिक शासन और गोलीकांड के बाद सेना और पुलिस ने आंदोलनकारियों के मुख्य व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया| कुछ लोगों ने भागकर जुब्बल रियासत में शरण ली| जुब्बल के राजा भक्त चंद ने उन्हें बड़ा सम्मान दिया| नाहन में एक ट्रिब्यूनल बैठा कर आंदोलनकारियों पर मुक़दमे चलाए गए| वैद्द सूरत सिंह, मियाँ गुलाब सिंह, अमर सिंह, मदन सिंह, कालीराम आदि को दस साल की सजा दी गयी|
झुग्गा आंदोलन:-
1883 से 1888ई. में बिलासपुर में राजा अमरचंद के विरोध में झुग्गा आंदोलन हुआ| राजा के अत्याचारों का विरोध करने के लिए गेहड़वी के ब्राह्मण झुग्गियां बनाकर रहने लगे और झुगों पर इष्ट देवता के झण्डे लगाकर कष्टों को सहते रहे और राजा के गिरफ्तार करने से पहले ही ब्राह्मण झुग्गों में आग लगाकर जल मरे| जनता भड़क गयी और अंत में राजा को बेगार प्रथा खत्म कर प्रशासनिक सुधार करने पड़े|
![]() |
| राष्ट्रिय आंदोलन |
हिमाचल प्रदेश से जुड़े राष्ट्रिय आंदोलन से संबंधित कुछ महत्वपुर्ण प्रश्न
- महात्मा गाँधी व जवाहर लाल नेहरू का ध्यान 1944 मे हिमाचल प्रदेश की और कैसे आकर्षित हुआ...देशी रियासतो द्वारा संघ बनाये जाने की योजना से
- अगस्त/सितम्बर 1946 की हिमालयन हिल स्टेटस रीज़नल कौसिल की कॉन्फरेंस मे किसे इसका अध्यक्ष चुना गया ...वाई. एस. परमार
- हिमाचल प्रदेश की किस देशी रियासत मे लोगो ने अपने शासक द्वारा द्वित्तीय विश्व युद्ध मे अँग्रेजों की मदद करने के निर्णय के विरुद्ध पझौता आंदोलन हुआ था...सिरमौर रियासत
- द्वित्तीय विश्व युद्ध के दौरान हिमाचल प्रदेश की किस देशी रियासत मे किसान सभा के अंग्रेजी सरकार के युद्ध प्रयास के विरोध करने के कारण पुलिस द्वारा निर्दयतापूर्ण दमन किया गया...सिरमौर रियासत
- 1939-45 के बीच किस राज्य के लोगो ने अँग्रेजों के युद्ध प्रयास का विरोध करते हुए एक स्वतंत्र सरकार की स्थापना की थी...सिरमौर राज्य (पझौता)
- 1914-15 के बीच मंडी के मियां जवाहर लाल को रियासत के शासक ने जेल की सजा क्यों दी...मंडी मे गदर पार्टी की स्थापना के लिए
- 1942 मे सिरमौर मे पझौता आंदोलन क्यों हुआ... अंग्रेजों के राजा द्वारा सहायता करने व जनता से भारी कर वसूलने के विरोध मे
- स्वाधीन केहलूर दल का उद्देश्य क्या था...स्वतंत्नता आंदोलन को दबा कर अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाए रखने के लिए राजा का दल था|
- मिया चू-चू कौन थे...सिरमौर के स्वतंत्नता सेनानी
- 1946 मे सर्वप्रथम किसने अलग पहाड़ी राज्य की स्थापना की मांग की...ठाकुर हजारा सिंह
- सिरमौर के किस आंदोलन से वैद्य सूरत सिंह का नाम जुड़ा हुआ है...पझौता आंदोलन(1942)
- हिमाचल प्रदेश के किस प्रमुख क्रांतिकारी को सन 1914 - 15 में मंडी में ग़दर पार्टी की शाखा स्थापित करने के कारण एक लम्बे कारावास की सजा हुई...मियां जवाहर सिंह
- 1927 में सुजानपुर टिहरा के ताल नामक स्थान पर आयोजित राजनैतिक सम्मेलन में कौन स्वंत्रता संग्राम के एक प्रमुख सेनानी के रूप में आगे आया...बाबा कांशीराम
- किस वामपंथी हिंदी उपन्यासकार ने अपने प्रारम्भिक दिनों में हिमाचल प्रदेश में क्रांतिकारियों के साथ कार्य किया था...यशपाल|
- 1914 - 15 के बीच किसने मंडी में ग़दर पार्टी की पहली शाखा की स्थापना की थी ...मियां जवाहर सिंह एवं खैरगढी की रानी ने
- 1946 के द्वित्तीय सिक्ख युद्ध के बाद काँगड़ा, जस्वान और दत्तारपुर के विद्रोही शासकों को अंग्रेजों ने किस स्थान पर निष्कासित किया था...अल्मोड़ा
- हिमाचल प्रदेश के किस नेता को राजभक्त न होने के संदेह में सिरमौर राज्य से निष्कासित कर दिया गया था...वाई एस परमार
- 1946 में पहाड़ी रियासतों के राज्य के निर्माण की सबसे पहले मांग किसने की...ठाकुर हजारासिंह
- राष्ट्रिय आंदोलन का समर्थन करने के कारण भज्जी रियासत के किस राणा को अंग्रेजों ने अपदस्त कर दिया था...राणा रुद्रपाल
- किस देशी रियासत ने 1947 में आजादी के बाद भारत में विलय के लिए प्रारम्भ में मना किया था...बिलासपुर
- पझौता सम्मलेन कब हुआ था...11 जून 1942
- 1914 -15 के मंडी षड्यंत्र से कौन संबधित नहीं है...शोभा राम
- शिमला से भारत छोड़ो आंदोलन का संचालन किसने किया था...राजकुमारी अमृत कौर
- “हिमालयन हिल्स स्टेट रीजनल कौंसिल” के पहले अध्यक्ष कौन थे...स्वामी पूर्णानंद
- गदर आंदोलन के किस नेता को लाहौर षड्यंत्र केस मे म्रत्यु दंड की सजा दी गयी जिसे बाद मे उम्रकैद मे बदल दिया गया...हृदयराम
- आजाद हिन्द फौज के प्रेरणात्मक गीत-कदम कदम बढ़ाए जा........के रचियता कौन ह हैं...राम सिंह ठाकुर
- गरली के किस सूद ट्रेडर्स ने शिमला में ‘बाल भारत सभा, की स्थापना की जिसका एजेंडा क्रांतिकारी था...दीनानाथ आंधी
- हिमाचल प्रदेश के किस जिले में स्वतंत्रता सेनानी चौधरी शेरजंग, माठा राम, दीप राम और सुनहरी देवी संबंधित हैं...सिरमौर
- किसने आज़ादी तक काले कपडे पहनने की सोगन्द ली थी...बाबा कांशीराम
- डॉ. यशवंत सिंह परमार ने फ़रबरी 1948 में सुकेत सत्याग्रह क्यों आरम्भ किया ...राजा लक्ष्मण सेन ने भारतीय संघ के विलय पत्र पर हस्त्ताक्षर नहीं किये थे
- ‘भाई दो न पाई’ आंदोलन किस आंदोलन का विस्तार था...सविनय अवज्ञा
- पहाड़ी रियासतों के हिमाचल प्रदेश में विलीनीकरण के मसले पर फ़रबरी 1948 में सोलन में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की...राजा दुर्गा सिंह
- 1914 -15 के प्रसीद षड़यंत्र के नेतृत्व किसने किया था...मियाँ जवाहर सिंह
- अल्पकालीन सरकार (1948) के प्रथम अध्यक्ष कौन थे...शिवानंद रमौल
- 1914 -15 में हुआ मंडी किससे षड़यंत्र किस्से प्रभावित था...ग़दर पार्टी
- हिमाचल प्रदेश में वह कौन सा स्थान है जहाँ एक महान क्रांतिकारी ने चालीस वर्ष तक देश निर्वासन के भीषण कष्ट झेलने के बाद अपने अंतिम दिन गुज़ारे और भारत की स्वंत्रता की घोषणा के पांच घंटे बाद ही वहां अपनी देह तयाग दी...डलहौज़ी
- 1946 ई में सर्वप्रथम किस व्यक्ति ने पहाड़ी राज्य के निर्माण की मांग की थी...ठाकुर हज़ारा सिंह
- आज़ाद हिन्द फ़ौज के मेजर दुर्गामल को किस वर्ष दिल्ली के लाल किले पर फांसी पर चढ़ाया गया..1944 में
- ठियोग रियासत में पहली उत्तरदायी सरकार 15 अगस्त 1947 को बनी थी इसका प्रथम प्रधानमंत्री किसे चुना गया था...सूरत राम प्रकाश
- सन 1942 में सिरमौर राज्य में किसान सभा द्वारा एक विद्रोही सरकार का गठन किया गया था...रियासत के शासक द्वारा अंग्रेज़ों के युद्ध प्रयत्न में सहायता करने के कारण


No comments:
Post a Comment