हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन
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| हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन से जुडी गतिविधियां |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना:-
देश की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चलाने वालों में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस का प्रथम स्थान रहा है| कांग्रेस के संगठन की कल्पना भारतीय सेवा से अवकाश प्राप्त एक स्कॉटलैंड वासी एलन ऑक्टेवियन ह्यूम का यह विचार था कांग्रेस केवल सामाजिक समस्या को अपने हाथ में ले, परन्तु उसने शिमला में जब अपने मन की बात गवर्नर जनरल लार्ड डफरिन के सामने रखी, तब डफरिन ने सुझाव के तौर पर उसे अपनी राइ दी की भारतीय राष्ट्र कल्याण की दृष्टि में रख एक संस्था को स्वंतत्र राजनैतिक संस्था के रूप में रहने दें| इसका पहला अधिवेशन बंबई में 28 दिसंबर, 1885 ई. को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज के हॉल में संपन्न हुआ| मुख्य प्रतिनिधियों में शिमला से A.O. hyum थे| सम्मलेन का सभापतित्व बैरिस्टर व्योमकेश चन्द्र बैनर्जी ने किया| आरम्भ में इस संस्था का अंग्रेज सत्ता से कोई द्वेष नहीं था| उस समय इसका उद्देश्य भारतीयों को प्रशासन में हिस्सा दिलाना था ऊँचे पदों पर नियुक्तियां करवाने से था| इस समय तक ऊँचे पदों पर अंग्रेज अधिकारी ही लगाए जाते थे| समय के साथ इसकी नीतियों में परिवर्तन आए और यह देश की एक राजनैतिक संस्था बन गई|
ग़दर पार्टी की स्थापना:-
उस समय देश से बाहर विदेशों में भी भारतीय देश को स्वतंत्र करवाने में लगे हुए थे| 1911ई. में लाला हरदयाल भारत से भाग कर फ्राँस होते हुए अमेरिका में स्थित सेन फ्रांससिस्को पहुँच गए| 1913ई. में उनकी पहल और 1857 के जन -विद्रोह की स्मृति में उन्होंने ग़दर नामक समाचार पत्र आरम्भ किया| उसी वर्ष अमेरिका में विभिन्न भारतीय समुदायों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में इंडियन एसोसिएशन नामक संगठन स्थापित किया और उसके प्रमुख नेता भी हरदयाल बने| शीघ्र ही इसका नाम बदलकर ग़दर पार्टी रख दिया गया| इसकी कई देशों में शाखायें थीं| अमेरिका में ये साप्ताहिक अख़बार ग़दर कई भारतीय भाषाओं में निकलते थे|
मण्डी
षड्यंत्र:-
प्रसिद्ध मण्डी षड्यंत्र 1914-15 की घटना गदर
पार्टी से प्रभावित होकर
घटी|गदर पार्टी के
कुछ लोग जब अमेरिका
से वापिस आए और उन्होंने
मण्डी और सुकेत की
रियासतो के लोगों में
अपने समर्थक बनाने के लिए कुछ
कार्य आरम्भ किया | 'गदर की गूंज'
साहित्य को पढ़कर उन्होंने
लोगों को उकसाया | मण्डी
की रानी खैरगढ़ी और
मिया जवाहर सिंह उनके प्रभाव
में आ गए रानी ने धन
देकर उन लोगों की
सहायता की | दिसम्बर 1914
और जनवरी 1915 में गुप्त बैठकें
करके यह निर्णय लिए
गया कि पुलिस अधिकारी और
वजीर को मार दिया
जाए और सरकारी कोष
को लूटा जाए तथा
व्यास नदी पर बने
पुल को उड़ा दिया
जाए | इसके पश्चात् मण्डी
और सुकेत की रियासतों पर अधिकार
किया जाए |
केवल
एक नागचला डकैती के इलावा वे
अपने सभी उद्देश्यों में असफल रहे | इस
असफलता के फलस्वरूप रानी
खैरीगढ़ी को मण्डी से
निष्कासित कर दिया गया | गदर
पार्टी के एक कार्यकर्ता 'भाई
हिरदा राम' को पंजाब
भेज कर बम बनाने
का प्रशिक्षण ग्रहण करने का कार्य सौंपा गया | इस पार्टी के कार्यकर्ताओं
की धर-पकड़ में भाई हिरदा राम पकड़ा गया और उसे लाहौर षड्यंत्र के मुकदमें में प्राण-दंड
दिया गया | बाद में उस दंड को उम्रकैद में बदल दिया गया| इस धर-पकड़ में हरदेव भागने
में सफल हो गया और वह भागकर गढ़वाल में बद्रीनाथ पहुँच गया|
उसने अपना नाम
बदल कर स्वामी कृष्णानंद रख लिया और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो कर 1917ई.में सिंध
प्रान्त के अहिंसात्मक आंदोलन में कूद पड़ा| अंत में सभी क्राँतिकारी पकड़े गए और उन
पर मुकदमें चल कर लम्बी-लम्बी कैद की सजाएं दी गईं | उन में मुख्य थे जवाहर नरयाल,मियां
जवाहर सिंह,बद्रीनाथ,सिध्द खराडा,ज्वाला सिंह,शारदा राम,दलीप सिंह,लौंगूराम | बाद में
हिरदा राम को काला पानी की सजा के लिए अंडमान भेज दिया गया| इसके पश्चात् मंडी का क्रांतिकारी संगठन
कमजोर पड़ गया|
महात्मा गाँधी
का शिमला आगमन:-
11 मई 1921 को गाँधी जी शिमला पधारे|उनके साथ मौलाना मुहम्मद अली,शौकत
अली,लाला लाजपतराय,मदन मोहन मालवीय,लाला दूनी चन्द आदि नेता भी शामिल थे| 13 मई को
गाँधी जी वायसराय लार्ड रीडिंग से मिले| दूसरे दिन गाँधी जी ने लोअर बाजार शिमला के
आर्य समाज के हल में महिलाओं को सम्बोधित किया|15 मई को उन्होंने पंद्रह हजार से अधिक
के एक जनसमूह को ईदगाह किया|शिमला के आस-पास के पहाड़ी क्षेत्रों से भी लोग गाँधी के
दर्शन के लिए आए थे| गाँधी जी के शिमला आगमन ने इस पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का ध्यान
राष्ट्रीय विचारधारा की ओर आकृष्ट किया| लगभग 1923 के पश्चात जुब्बल रियासत के गाँव
धार के इजीनियर भागमल सौहटा ने राष्ट्रिय आंदोलन में प्रवेश किया| सं 1922-1923 तक
शिमला में कांग्रेस आंदोलन ने जोर पकड़ा| इसमें पं.गौड़मल,मुहम्मद नौनी,अब्दुल गनी,गुलाम
मुहम्मद नकवी,ठाकुर भगीरथ लाल,हकीम त्रिलोकीनाथ भाग लेने वाले प्रमुख व्यकित थे|
सैमुअल
इवांस स्टोक्स और बाबा कंशीराम:-
कुछ समय पूर्व
अमेरिका से आए एक
व्यक्ति सैमुअल इवांस स्टोक्स ने शिमला पहाड़ियों
के ऊपरी भाग कोटगढ़
में रहना आरम्भ किया|
उन्होंने गाँधी जी के विचारों
से प्रभावित होकर बेगार की
प्रथा के विरुद्ध सारी
पहाड़ी रियासतों में आंदोलन चलाया|
उन्होंने हिन्दू धर्म अपना लिया
और सत्यानंद स्टोक्स बन गए | असहयोग
आंदोलन में भाग लेने
के कारण उन्हें बंदी
बना लिया गया | उन्हें
24 मार्च 1923 को अन्य
लोगों के साथ शिमला
में केथू जेल से
रिहा किया| सत्यानंद स्टोक्स ने जेल से
रिहा होने के पश्चात
पहाड़ी रियासतो में अपना समाज-सुधार और राजनैतिक जागृति
का कार्यक्रम जारी रखा|
काँगड़ा से बाहर
काम करने वाले भी राष्ट्रीय आंदोलन से प्रभावित होते रहे| जब वे वापस अपने गाँव आते
तो वे कांग्रेस के कार्य को आगे बढ़ाते और उन के जलसों में भाग लेते| ऐसे ही एक सम्मेलन
1927ई. में सुजानपुर के पास ताल में हुआ, जिसमें बलोच सिपाहियों ने लोगों को बुरी तरह
पीटा| इस मारपीट में ठाकुर हजारा सिंह,बाबा कांशीराम (पहाड़ी गाँधी),गोपाल सिंह और चतुर
सिंह भी शामिल थे| सिपाहियों ने उनकी टोपियां भी छीन लीं| इसके विरुद्ध पहाड़ी गाँधी
बाबा कांशीराम ने शपथ ली कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होता वह काले कपड़े पहनेंगे| कांग्रेस
के आंदोलन में बाबा कांशीराम और हजारा सिंह का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है| बाबा कांशीराम
को 'पहाड़ी गाँधी' का ख़िताब 1937 में गदडीवाला जनसभा में पं. जवाहरलाल नेहरू ने दिया|
उन्हें सरोजनी नायडू ने 'पहाड़ी बुलबुल' का ख़िताब दिया|
राष्टीय
नेताओं का आगमन:-
लाला
लाजपतराय 1906 ई.में
मंडी आए| थियोसोफिकल सोसाइटी
की नेता ऐनी बेसेंट
1916ई. में शिमला आई|
महात्मा गाँधी,मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली, लाला लाजपतराय
और मदन मोहन मालवीय
ने पहली बार 1921
ई.में शिमला में
प्रवास किया| मुस्लिम लीग का नेता मोहम्मद
अली जिन्ना वायसरॉय लार्ड रीडिंग से मिलने शिमला आए|
महात्मा
गाँधी 1921, 1931, (3 बार) 1939, 1945 और 1946
में शिमला आए| महात्मा गाँधी
1945 में मनोरविला (राजकुमारी
अमृत कौर का निवास)और
1946 में चैडविक समर
हिल में रुके|
आंदोलनकारी:-
ऋषिकेश लट्ठ ने ऊना
में 1915 ई.में क्रांतिकारी
आंदोलन की शुरुआत की|
हमीरपुर के प्रसिद्ध साहित्यकार
यशपाल 1918 ई.में
स्वाधीनता संग्राम में कूदे| यशपाल
को 1932 ई.में
उम्रकैद की सजा हुई|
वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के चीफ कमाण्डर
थे| इण्डियन नेशनल आर्मी के मेजर मेहर
दास को ‘सरदार-ए-जंग’ कैप्टन बक्शी
प्रताप सिंह को 'तमगा-ए-शत्रुनाश'और
सरकाघाट के हरी सिंह
को 'शेर-ए-हिन्द'
की उपाधि दी गई| धर्मशाला
के 2 गोरखा भाइयों और दल बहादुर
थापा को दिल्ली में
फांसी दे दी गई|
सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाते हुए 1930 में
बाबा लछमन दास और
सत्य प्रकाश "बागी" को ऊना में
गिरफ्तार कर लिया गया|
1920
के दशक की घटनाएँ:-
1920 में हिमाचल में
असहयोग आंदोलन शुरू हुआ |शिमला
में कांग्रेस के प्रथम प्रतिनिधि
मंडल का 1921 ई.
में गठन किया गया|
देसी रियासत के शासकों ने 'चेम्बर
ऑफ प्रिंसेज' (नरेंद्र मंडल) का 1921 में
गठन किया| दिसम्बर, 1921 में इग्लैण्ड
के युवराज 'प्रिंस ऑफ़ वेल्स' के
शिमला आगमन का विरोध
हुआ| लाला लाजपतराय को
1922 में लाहौर से
लाकर धर्मशाला में बंद किया
गया| वायसराय लार्ड रीडिंग
ने 1925 ई. में
शिमला में "सेंट्रल कौंसिल चेंबर" (वर्तमान विधानसभा) का उद्घाटन किया|
शिमला और काँगड़ा में
1928 ई. में साइमन
कमीशन का भारत आगमन
पर विरोध हुआ|
सविनय
अवज्ञा आंदोलन:-
27 फरवरी 1930 को गाँधी
जी ने देश में
सविनय अवज्ञा आंदोलन आरम्भ करने की| घोषणा
की शिमला तथा काँगड़ा के
कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन
में भाग लिया| इसके
बारे में स्थान-स्थान
पर जलसे होते रहे
और जुलूस निकले गए| बहुत से
कांग्रेस के लोग पकड़
लिए गए और उन्हें
जेल भेज दिया गया|
इस सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए शिमला
में लाला गेंडामल डॉ.नंद लाल
वर्मा,लक्ष्मी देवी,रूप लाल
मेहता,सुंदर दास,लखन पाल,सत्यवती खोसला,द्वारिका प्रसाद,नवल किशोर,वासुदेव
दीनानाथ आंधी आदि लोग
गिरफ्तार किए गए और
उन्हें कड़े कारावास की
सजा दी गई| 20
जुलाई 1930 तक शिमला
में 494 सत्याग्रही पकड़े
गए और दण्ड देकर
शिमला,अम्बाला,लुधियाना,मुल्तान,लाहौर,मोंटगुमरी और अमृतसर जेलों
में भेज दिया गया|
काँगड़ा में भी अक्टूबर
1930 तक 700 सत्याग्रही
गिरफ्तार कर लिए गए
थे|
गाँधी-इरविन समझौता:-
सविनय अवज्ञा आंदोलन से निपटने के
लिए वासराय लार्ड इरविन
ने मार्च 1931 को समझौता
करने के लिए गाँधी
जी को शिमला बुलाया
उनके साथ जवाहर लाल
नेहरू,मौलाना अब्दुल कलाम आजाद,खान
अब्दुल गफ्फर खान,मदन मोहन
मानवीय , डॉ. अंसारी भी
थे| वह पुन: बात
करने के लिए 5
मई 1931 को फिर
शिमला आए| इस बार
गाँधी जी ने रिज
मैदान में भाषण भी
दिया| इरविन-गाँधी समझौते पर हस्ताक्षर करने
के लिए गाँधी जी
एक बार फिर 25अगस्त
1931 को शिमला पधारे|
उनके साथ पं.जवाहर
लाल नेहरू,सरदार वल्ल्भ भाई पटेल तथा
सर प्रभाशंकर पटटनी भी थे|
धामी
गोली कांड:-
16 जुलाई
1939 को धामी गोली
कांड हुआ| 13 जुलाई
1939 ई.को शिमला
हिल स्टेटस हिमालय रियासती प्रजा मंडल के नेता
भागमल सौहटा की अध्यक्षता में
धामी रियासतों के स्वयंसेवकों की
बैठक हुई| इस बैठक
में धामी प्रेम परचरिणी
सभा पर लगाई गई
पाबंदी को हटाने का
अनुरोध किया जिसे धामी
के राणा ने मना
कर दिया| 16 जुलाई 1939
में भागमन सौहटा के नेतृत्व में
लोग धामी के लिए
रवाना हुए| भागमन सौहटा को घणाहट्टी में गिरफ्तार
कर लिए गया| राणा ने हलोग चौक के पास इकट्ठी जनता पर घबराकर गोली चलाने की आज्ञा दे
दी जिसमें 2 व्यक्ति मारे गए व् कई घायल हो गए| महात्मा गाँधी की आज्ञा पर नेहरू ने
दुनीचंद वकील को इस घटना की जाँच के लिए नियुक्त किया|
भारत
छोड़ो आंदोलन:-
14 जुलाई 1942
ई. को कांग्रेस की
कार्यकारिणी सभा ने वर्धा
में गाँधी जी के 'भारत
छोड़ो'प्रस्ताव को पारित किया|
8 अगस्त 1942 ई.को
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बंबई बैठक में 'भारत
छोड़ो आंदोलन' को चलाने का निर्णय लिया गया| गाँधी जी को इस आंदोलन का नेतृत्व सौंपा
गया शिमला,काँगड़ा और अन्य पहाड़ी क्षेत्रो में " अँग्रेजों भारत छोड़ो" के सम्बन्ध
में जलसे- जुलूस और आंदोलन
आरंभ हुआ तथा 'भाई दो पाई दो' का नारा गाँव-गाँव में गूंजा| इस आंदोलन के दौरान शिमला
में भागमन सौहटा पं.हरिराम,चौधरी दीवान चंद,सलिगरम शर्मा,नन्द लाल वर्मा,तुफैल अहमद,ओम
प्रकाश चोपड़ा ,सन्त राम,हरिचन्द आदि आंदोलनकारी गिरफ्तार किए गए| उन्हें कड़े कारावास
की सजा देकर पंजाब की जेलों में बंद कर दिया गया|
शिमला से राजकुमारी अमृतकौर
"भारत छोड़ो आंदोलन" का संचालन करती रही| तथा गाँधी जी के कैद में बंद होने
पर उनकी पत्रिका "हरिजन" का सम्पादन करती रहीं| गाँधी जी के समर्थक में काँगड़ा
के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भी सत्याग्रह में भाग लिया| भारत छोड़ो आंदोलन के समय
कई लोगों ने इसमें अपना योगदान दिया| इस प्रकार के आंदोलनों में भाग लेने वालों में
मंगल राम खन्ना, हेमराज सूद, कॉमरेड रामचंद्र, परस राम,सरला शर्मा ब्रहानन्द और पं.अमर
नाथ प्रमुख थे| मई 1944 ई.में महात्मा गाँधी को जेल से रिहा किया गया| परिणामस्वरूप
"भारत छोड़ो आंदोलन "कुछ धीमा पड़ गया सितम्बर 1944 ई.में हिमाचल में
"भारत छोड़ो आंदोलन" में गिरफ्तार नेताओं को रिहा कर दिया गया|
वेवल योजना:-
14
मई 1945 ई.को लंदन में भारत सचिव एम.एल.एमरी ने पार्लियामेंट में भारत के राजनैतिक
हल के लिए योजना की घोषणा की जिसे इतिहास में "वेवल-योजना" कहा जाता है|
इसके अनुसार वायसराय लार्ड वेवल ने भारतीय रजनैतिक दलों को 25 जून 1945 को शिमला में
बातचीत के लिए आमंत्रित किया| इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित दलों के प्रतिनिधि
शिमला पँहुचें| इसमें कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद तथा जवाहर लाल नेहरू,सरदार
वल्ल्भ भाई पन्त,पट्टाभिसीतारमैया,शंकर राम देव,जय दास दौलत राम,रवि शंकर शुक्ल,सुचेता
कृपलानी, सरोजिनी नायडू,भोला भाई देसाई,आसिफ अली,अरुणा आसिफ,मीराबेन आदि कांग्रेस के
नेता शिमला आए| सलाह-मशविरा देने के लिए महात्मा गाँधी भी शिमला आए और समरहिल में राजकुमारी
अमृत कौर के निवास स्थान मनौरविला में ठहरे|
25 जून 1945 को वायसराय के निवास स्थान
"वायस रीगल लॉज" में 21 प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया| इन 21 प्रतिनिधियों
में मुस्लिम लीन के मुख्य प्रतिनिधि मुहम्मद अली जिन्नाह थे| इस कांफ्रेंस में कांग्रेस
ने राजनितिक समस्याओं पर तो संतोष प्रकट किया,परन्तु मुस्लिम लीन के साम्प्रदायिक द्रष्टिकोण
पर उनसे अपना असंतोष व्यक्त किया यधपि यह सम्मेलन कई दिनों तक चलता रहा और वायसराय
ने ईमानदारी के साथ बीच-बचाव भी किया तथापि लीन के हठ के सामने सम्मेलन फीका पड़ गया|
अंत में 14 जुलाई को वायसराय की घोषणा के साथ सम्मेलन समाप्त हो गया
अंतरिम सरकार
का गठन:-
मई 1946 ई.में बर्तानिया से एक केबिनेट-मिशन भारतीय नेताओं से बातचीत करके भारत
आया| भारतीय नेताओं, वायसराय लार्ड वेवल तथा केबिनेट मिशन की बैठकें इस बार भी शिमला
में 5 मई से 12 मई,1946 तक होती रहीं| मस्लिम लीन की हठधर्मी
से इसे कोई अधिक सफलता तो नहीं मिल पाई परन्तु वायसराय लार्ड वेवल अंतरिम सरकार बनाने
में सफल हुए और बाद में लीन वालों ने भी सरकार में सम्मिलित होने में बुद्धिमानी समझी
और वायसराय से बात कर ली| अत: 2 सितम्बर,1946 को कांग्रेस ने भारत में अंतरिम सरकार
बनाई और 26 अक्टूबर,१९४६ को मुस्लिम लीन के नेता भी सरकार में सम्मिलित हो गए|
हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन से जुडी गतिविधियां: महत्वपूर्ण प्रश्न
- गदर आंदोलन के किस नेता को लाहौर षड्यंत्र केस मे म्रत्यु दंड की सजा दी गयी जिसे बाद मे उम्रकैद मे बदल दिया गया... हृदयराम
- आजाद हिन्द फौज के प्रेरणात्मक गीत-कदम कदम बढ़ाए जा, के रचियता कौन थे ...राम सिंह ठाकुर
- गरली के किस सूद ट्रेडर्स ने शिमला में ‘बाल भारत सभा, की स्थापना की जिसका एजेंडा क्रांतिकारी था...दीनानाथ आंधी
- हिमाचल प्रदेश के किस जिले में स्वतंत्रता सेनानी चौधरी शेरजंग, माठा राम, दीप राम और सुनहरी देवी संबंधित हैं...सिरमौर
- किसने आज़ादी तक काले कपडे पहनने की सोगन्द ली थी...बाबा कांशीराम
- डॉ. यशवंत सिंह परमार ने फ़रबरी 1948 में सुकेत सत्याग्रह क्यों आरम्भ किया ...राजा लक्ष्मण सेन ने भारतीय संघ के विलय पत्र पर हस्त्ताक्षर नहीं किये थे
- ‘भाई दो न पाई’ आंदोलन किस आंदोलन का विस्तार था...सविनय अवज्ञा
- पहाड़ी रियासतों के हिमाचल प्रदेश में विलीनीकरण के मसले पर फ़रबरी 1948 में सोलन में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की...राजा दुर्गा सिंह
- 1914 -15 के प्रसिद्ध मंडी षड़यंत्र का नेतृत्व किसने किया था...मियाँ जवाहर सिंह
- अल्पकालीन सरकार (1948) के प्रथम अध्यक्ष कौन थे...शिवानंद रमौल
- 1914 -15 में हुआ मंडी षड़यंत्र किससे प्रभावित था...ग़दर पार्टी
- हिमाचल प्रदेश में वह कौन सा स्थान है जहाँ एक महान क्रांतिकारी ने चालीस वर्ष तक देश निर्वासन के भीषण कष्ट झेलने के बाद अपने अंतिम दिन गुज़ारे और भारत की स्वंत्रता की घोषणा के पांच घंटे बाद ही वहां अपनी देह त्याग दी...डलहौज़ी
- 1946 ई में सर्वप्रथम किस व्यक्ति ने पहाड़ी राज्य के निर्माण की मांग की थी...ठाकुर हज़ारा सिंह
- आज़ाद हिन्द फ़ौज के मेजर दुर्गामल को किस वर्ष दिल्ली के लाल किले पर फांसी पर चढ़ाया गया..1944 में
- ठियोग रियासत में पहली उत्तरदायी सरकार 15 अगस्त 1947 को बनी थी, इसका प्रथम प्रधानमंत्री किसे चुना गया था...सूरत राम प्रकाश
- सन 1942 में सिरमौर राज्य में किसान सभा द्वारा एक विद्रोही सरकार का गठन किया गया था...रियासत के शासक द्वारा अंग्रेज़ों के युद्ध प्रयत्न में सहायता करने के कारण


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